देसी लड़की Xxx कहानी में मेरे पड़ोस मेरे दूर के मामा का घर था. उनकी जवान बेटी मुझे पसंद थी. वो दूकान पर बैठती थी. एक दोपहर मैंने उसे कैसे चोदा?
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राजीव है, मेरी उम्र 28 साल है और मैं राजस्थान के पाली जिले का रहने वाला हूं।
वैसे तो मैं इस साइट पर पिछले आठ-नौ सालों से कहानियां पढ़ रहा हूं लेकिन खुद की कहानी भेजने का कभी सोचा नहीं।
लेकिन आज विचार किया कि मैं भी अपनी हसीन जवानी का किस्सा आप लोगों के साथ साझा करूं।
मैंने हमारा परिचय गोपनीयता की वजह से बदल दिया है।
ये देसी लड़की Xxx कहानी आज से दस साल पहले की है, जब जवानी हिलोरे मार रही थी और बस किसी भी हालत में चूत मिल जाए, इसके अलावा जिंदगी का कोई लक्ष्य भी नहीं था।
मेरे पास उस वक्त मल्टीमीडिया फोन था, तो उसमें 2G के रिचार्ज से सेक्स वीडियो डाउनलोड करते और वीडियो देख-देखकर दिन में दो या तीन बार मुठ मार लेते।
बात है मई-जून महीने की, जब हमारे यहां गर्मी अपने प्रचंड रूप में होती है।
एक दिन दोपहर में मैं मोहल्ले में ही स्थित एक छोटी सी किराने की दुकान पर गुटखा लेने गया।
ये दुकान मेरे दूर के मामा की थी।
मैं रोज दोपहर में गुटखा लेने जाता क्योंकि उस वक्त दुकान पर मेरे मामा की लड़की बैठती थी।
और मैं उसे मन ही मन चाहता था, या यूँ कह लीजिए कि वो मेरा पहला प्यार था।
मामा की लड़की का नाम कंचन था, वो मेरी हमउम्र ही थी।
हम साथ में बड़े हुए और ज़ब उम्र के उस पड़ाव पर पहुंचे ज़ब लड़की लड़की लगना शुरू होती है तब मेरी नजर हमेशा उसके वक्ष पर होती।
कंचन का एक छोटा भाई था, जो मामा और मामी के साथ जोधपुर में रहता था।
मामा-मामी जोधपुर में एक किराने की दुकान चलाते थे।
कंचन यहां अपने दादा-दादी के साथ रहती थी।
कंचन एकदम गोरी-चिट्टी थी। उसकी लंबाई लगभग 5 फुट, बोबे 30″, कमर 26″ और गांड 28″ की थी।
उस दिन मैं दोपहर में उसकी दुकान पर गया तो उस वक्त वो घर के अंदर टीवी पर गाने चला रही थी।
मैंने दो-तीन बार आवाज दी, तो उसने अंदर से बोला कि आ रही हूं।
मुझे गुटखे की तगड़ी तलब लगी हुई थी, तो मैं आवाज देते हुए घर के अंदर चला गया।
क्योंकि एक तो मामा का घर, और दूसरा पूरा मोहल्ला सुनसान था।
और उस वक्त दिमाग में ऐसी कोई चीज भी नहीं थी, तथा मेरे मन में था कि नाना-नानी घर पर होंगे।
घर के अंदर गया, तो मैंने उसे बोला- कंचन, तो गुटखा देना!
कंचन- दो मिनट रुक, देती हूं!
मैं- जल्दी दे, मुझे बड़ी तलब आई है!
कंचन- रुक जा, गाना लगाकर देती हूं!
मैं- नाना कहां हैं? उनसे ले लेता हूं!
कंचन- दादा-दादी तो बाहर गए हैं, शाम को आएंगे!
ये बोलकर वो गुटखा लेने बाहर दुकान पर चली गई और मैं कुर्सी पर बैठकर टीवी देखने लग गया।
उसे वापिस गुटखा लेकर आते हुए देखकर मैंने एक्साइट होकर कहा- जल्दी ला! जल्दी ला! मेरी जान निकल रही है!
ऐसा सुनते ही उसने मुझे चिढ़ाने की सोची और बोली- पहले पैसे दे, बाद में दूंगी!
और उसने गुटखा छुपा लिया।
मैंने कहा कि पैसे शाम को दूंगा, तो वो मुझे चिढ़ाने लगी।
और गुटखा मुट्ठी में भींचकर मेरी कुर्सी के पास खड़ी होकर टीवी देखने लगी।
उस दिन तक हम दोनों ने कभी भी एक-दूसरे से गलत बात नहीं की, हालांकि मन ही मन मैं उसे चाहता था, लेकिन कभी बताया नहीं।
वो मेरे पास खड़ी थी, तभी मैंने मौका देखकर उसके हाथ पकड़ लिए.
तो उसने भी जबरदस्ती करनी शुरू कर दी।
हम दोनों आपस में एक तरह से कुश्ती करने लगे।
उसी गुत्थम-गुत्था में मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया और उसने अपने दोनों हाथों को आपस में बांधकर अपने सीने से चिपका लिए।
मैं गुटखा छीनने के चक्कर में उसके हाथों की मुट्ठियां खोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन अनजाने में मेरे हाथों से उसके बोबे मसले जा रहे थे।
जिसका मुझे तो कुछ ध्यान नहीं रहा लेकिन कंचन धीरे-धीरे मूड में आने लगी और कसमसाने लगी।
एक तो पीछे से पकड़ा हुआ, उसकी गांड से चिपका हुआ और बोबे मसल रहा हूं – अलग से ये सब कंचन बर्दाश्त नहीं कर पाई और गुटखा छोड़कर पीछे मुड़कर सीधे मेरे गले लग गई।
और मुझे कसकर पकड़ लिया।
मेरी तो कुछ समझ में नहीं आया, तो मैंने उसे छोड़ने को बोला।
लेकिन उसने मुझे ऐसी नजर से देखा कि मैं खुद हिल गया।
उसका चेहरा एकदम लाल हो गया था।
मैंने कहा- छोड़, कोई देख लेगा!”
तो उसने सिर्फ इतना कहा- दरवाजा बंद करके आ जा!”
मेरी तो मानो लॉटरी लग गई!
मैं भागकर गया और गेट बंद करके आ गया।
आते ही उसे पीछे से पकड़ लिया और कंधे पर किस करने लगा।
वो वापिस मुड़ी और फिर से गले लग गई।
तब मैंने उसका चेहरा ऊपर किया और होंठ चूसने लगा … कभी ऊपर का, कभी नीचे वाला।
करीब 5 मिनट तक होंठ चूसने के बाद मैंने कहा- दूध पीना है!
तो वो शर्मा गई और मना करने लगी।
तो मैंने उसके बोबे दबाने शुरू कर दिए।
वो फिर से अह-अह… ओह मम्मी… ई-इ करने लगी।
बोबे दबाते-दबाते मैंने उसे पास पड़ी खाट पर सुला दिया और उसके गले पर किस करने लगा।
उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और मेरे बाल सहलाते हुए सिर्फ उह-आह-आह की आवाजें निकालने लगी।
धीरे-धीरे मैं नीचे आ गया और कपड़ों के ऊपर से ही उसके बोबे चूसने लगा।
उससे ये सहन नहीं हुआ और उसने मेरा मुंह बोबों पर दबा दिया।
फिर धीरे-धीरे मैंने उसकी कुर्ती ऊपर की और उसके छोटे-छोटे 28 के बोबे बाहर ले आया।
एकदम सफेद, उसमें उसकी हरी नसें साफ दिख रही थीं, उस पर एकदम गुलाबी निप्पल।
ओह, क्या बताऊं यार…
ये दृश्य देखकर मेरा मानो फट ही जाएगा, ये हालत हो गई।
फिर मैंने धीमे-धीमे उसके गुलाबी दानों पर हल्की-हल्की जीभ फेरना चालू किया, जिससे वो बीच में से एकदम ऊपर हो गई, मानो धनुष की तरह।
फिर धीरे-धीरे मैं कभी दांया बोबा चूसता, तो कभी बांया।
और कंचन अपनी मदहोशी में उह-आह कर रही थी।
मैं धीरे-धीरे नीचे आया और उसकी नाभि में जीभ फेरने लगा, साथ ही उसका सलवार का नाड़ा खोल दिया।
नाड़ा खुलते ही वो एकदम होश में आई और इससे ज्यादा कुछ नहीं करने की जिद करने लगी।
मेरा तो एकदम KLPD होने लगा।
फिर मैंने उसे पटाया कि आगे कुछ नहीं करूंगा, सिर्फ यार मेरी एक इच्छा है, वो पूरी कर दे।
उसने पूछा- क्या?”
तो मैंने उसे मेरे फोन में सेक्स वीडियो निकालकर उसमें चूत चाटने का सीन बताया और बोला- बस एक बार चाटने दे।
सीन देखकर थोड़ी इच्छा उसकी भी हो गई, तो थोड़ी ना-नुकुर के बाद मान गई।
तो जैसे ही मैंने उसका सलवार उतारा, ओह भाई, क्या सीन था… लाल पैंटी में एकदम गोरी जांघें, क्या बताऊं!
मैंने पैंटी के ऊपर से जीभ फेरना चालू किया और धीमे-धीमे पैंटी उतार दी।
अंदर झांटों वाली गुलाबी चूत, जो मैंने खुद ने पहली बार सामने से देखी।
फिर थोड़ी देर उसकी झांटों में नाक फेरी और धीरे-धीरे चूत की ओर बढ़ गया।
चूत पर जीभ लगते ही कंचन कांपकांपाने लगी और पानी छोड़ दिया।
मैं बड़ी मस्ती में चूत चाटने लगा।
थोड़ी देर में वो मेरा सिर चूत में दबाने लगी और मैं भी पूरी जीभ चूत में डालने की कोशिश करने लगा।
चूत चाटने का फायदा हुआ और कंचन कहने लगी- मेरी चूत में कुछ डाल दे! अह-अह, डाल! ओह!
देसी लड़की Xxx चुदाई के लिए कह रही थी.
मैंने भी देर नहीं की और फटाक से लंड निकालकर चूत पर रगड़ने लगा।
कुदरत की चिकनाई से चूत चमक रही थी।
मैंने भी धीरे-धीरे जगह बनाकर टोपा फंसा दिया।
फिर आराम से कंचन को कब्जे में लिया और एक झटके में 6″ का लंड उसकी बच्चेदानी से भिड़ा दिया।
इस एकदम से हुए हमले से कंचन की चीख निकल गई तो मैंने उसे सहलाते हुए वही ज्ञान दिया कि पहली बार है, दर्द होगा!
फिर थोड़ी देर बाद हल्के-हल्के झटके लगाने लगा।
क्योंकि मेरा भी पहला चूत शिकार था तो पांच मिनट बाद मैं भी चूत में निकल गया।
दस मिनट उसके ऊपर लेटा रहा और बाद में उठकर कंचन की चूत साफ की और उसे गर्म पानी से सेक की सलाह देकर घर आ गया।
ये थी मेरी पहली सेक्स कहानी।