Antarwasna : दीदी ने लंड बर्थडे गिफ्ट में माँगा (Birthday par chudai sex story)

Antarwasna : Didi ki chut sex story, Bahan ki chudai sex story, Blue film dekh kar chudai, Birthday par chudai gift: मैं अभी 21 साल का हुआ हूँ। देखने में बहुत ही खूबसूरत लगता हूँ। मेरे मोहल्ले की सारी लड़कियां मरती हैं मुझ पर। लेकिन मैं भी किसी को लिफ्ट नहीं देता। मेरे एटीट्यूड को देख कर अच्छे अच्छे घर की लड़कियां भी फिदा हो जाती हैं। लेकिन सच तो ये था कि किसी भी लड़की से बोलने से हमें डर लगता था। इसीलिए मैं कभी किसी को गर्लफ्रेंड नहीं बना पाया।

एक लड़की से इंटर में पहुंचते पहुंचते आँख मटक्का भी किया। तो उसका बाप उसे लेकर कहीं और ही चला गया। उसकी चूंचियों को मैं आज तक नहीं भूल पाया। मेरे नसीब में लग रहा था चूत की एक भी झलक ही नहीं लिखी है। लेकिन क्या पता था कि मुझे मेरे घर में ही चूत मिल सकती है। वो भी दीदी जैसी खूबसूरत लड़की की।

फ्रेंड्स बात कुछ ही दिन पहले की है। जब मैंने अपनी दीदी से चुदाई करना सीखा। उनका नाम दीक्षा है। वो बहुत ही हॉट और सेक्सी लगती है। उनके कसमसाते बदन को देखने में बहुत ही आनंद मिलता है। मैं भी उनको खूब ताड़ता था। लेकिन मैंने अभी तक उनको चोदने की नजर से नहीं देखा था। मैं और दीदी सभी लोग साथ में हाल में आ गए।

कुछ मेहमान भी आये थे। दीदी ने बहुत ही जबरदस्त कपड़ा पहना था। आज उनका बर्थडे था। उनकी ब्रा की पट्टियां अच्छे से साफ साफ गुलाबी रंग की दिख रही थी। लेकिन मुझे क्या पता था कि आज इन्हें छूने का अवसर भी मिलेगा। मैंने भले ही किसी को अभी तक चोदा न था लेकिन चोदने की तड़प मुझमें कूट कूट कर भरी हुई थी।

मेरा सिकुड़ा लंड बड़ा होने लगा। मुझसे अब रुका नहीं जा रहा था। मेरा लंड पैंट को फाड़कर बाहर आने को मचलने लगा। मेरी दीदी ये सब शायद देख रही थी। मैं वहाँ से किसी तरह से भाग कर बाथरूम में आया। 10 मिनट तक हाथ से काम चलाने के बाद मेरा माल निकल आया। सब माल निकाल कर थोड़ा रिलैक्स फील किया।

उसके बाद मैंने पैंट पहना और फिर से सबके साथ चला आया। अब मेरा लंड सिकुड़ चुका था। दीदी ने केक काटा। सभी लोग तालियां बजा कर हैप्पी बर्थडे टू यू……. कहने लगे। उसके बाद सब लोग खाना खाकर मजे से बात कर रहे थे। रात काफी हो चुकी थी। पड़ोसी और सारे मेहमान अपने अपने घर चले गए। घर पर मम्मी पापा ही थे।

वो लोग भी थक कर कुछ ही देर में सो गये। मुझे और दीदी को नींद ही नहीं आ रही थी। हम दोनों लोग आज भी एक ही रूम में सोते थे। मेरी दीदी बहुत गोरी और सेक्सी लड़की थी। उनका बदन भरा हुआ और गदराया सेक्सी बदन था। कोई भी मेरी दीदी को देखकर सेंटी हो जाता, वो इतनी सुंदर थी।

दीदी- “जन्मेजय तुम्हें नींद आ रही है??”

मैं- “नहीं दीदी मुझे नहीं आ रही। आपको??”

दीदी- “मुझे भी नहीं आ रही है यार.”

मैं- “दीदी चलो हम सब बात करते हैं.”

दीदी का बिस्तर मेरे बिस्तर से दूर था।

दीदी- “तेज बोलोगे तो आवाज होगी। तुम मेरे बेड पर ही आ जाओ.”

मैं- “ओके दीदी.”

दीदी- “और बताओ आज पार्टी में मजा आया??”

मैं- “बहुत मजा आया। वो आपकी दोस्त लोग बहुत अच्छी थी.”

दीदी- “क्यों मैं अच्छी नहीं लगती क्या.”

मैं- “अपनी तो बात ही न किया करो। आपसे भी कोई अच्छा हो सकता है क्या??? आप तो करोड़ों में एक हो” ऐसा मैंने उनकी गुलाबी रंग की ब्रा की तरफ देखते हुए कहा।

दीदी- “तुम्हारी नजर कहाँ है??”

मैं- “कहीं नहीं। मैं तो दीवाल को देख रहा था” मुझे डर लगने लगा।

दीदी- “जन्मेजय मेरी पीठ में खुजली हो रही है.”

मैं- “दीदी मैं खुजला देता हूँ.”

दीदी अपनी मेरी तरफ अपनी पीठ करके लेट गई। मैं खुजलाने लगा। उनकी ब्रा की पट्टियां मेरे हाथों में लग रही थी। मेरा लंड तो रॉकेट की तरह खड़ा होने लगा। मैं बहुत ही बेचैन होने लगा। हुक सहित मैं पूरे ब्रा की पट्टियों पर हाथ फिराने लगा। वो मुझे देख कर हँसने लगी। मैं “क्या बात है दीदी.”

दीदी- “देख लो मेरी पीठ पर लाल लाल तो नहीं हुआ है कुछ। मुझे अब भी खुजली हो रही है.”

मैं- “नहीं दीदी आप जाकर शीशे में देख लो.”

दीदी- “देख लो यार आज मुझे मना न करो मेरा बर्थडे है.”

इतना कहकर उन्होंने अपनी नेट वाली टी शर्ट को उठाकर गले पर कर लिया। मुझे सब कुछ साफ साफ दिख रहा था। उनका मुंह टी शर्ट से ढका हुआ था। मैंने उनके गोरी गोरी चूंचियों को देखने लगा। आगे की चूंचियों को देखकर मैं पीछे की खुजली की बात करने लगा।

उनकी गोरी चूंचियों को देखकर मैंने कहा- “दीदी सब नॉर्मल है। कहीं एक भी दाग नहीं नजर आ रहा” दिल तो कर रहा था अभी इन खरबूजों को काटकर खा जाऊं। मेरी नजर ही वहाँ से नहीं हट रही थी। दीदी ने अपने टी शर्ट को मुंह से हटाया तो मुझे चुच्चों को ताड़ते हुए देख ली। मैंने कहा- “दीदी मैं अभी इधर एक कीड़े को जाते देखा था। पता नहीं कहाँ गायब हो गया.”

दीदी ने कहा- “मुझे इस टी शर्ट में खुजली हो रही है। मैं इसे निकाल देती हूँ.”

इतना कहकर उन्होंने निकाल कर चादर ओढ़ ली। मुझे भी ठंड लगने लगी। मैंने कहा- “दीदी मैं जा रहा हूँ अपने बिस्तर पर मुझे ठंड लग रही है.” उन्होंने चादर उठाते हुए मुझे ढका और चिपकाने लगी। मेरे सीने में उनकी 34″ की चूंचियां लग रही थी। मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। उनकी चूंचियों को दबाने का जी करने लगा।

दीदी- “तुम अपनी किसी गर्लफ्रेंड को नहीं बुलाये थे मेरे बर्थडे पार्टी में.”

मैं- “कोई होगा तभी तो बुलाऊंगा। जब कोई है ही नहीं तो किसको बुला लूं.”

दीदी- “हमसे झूठ बोल रहे हो तुम??”

मैं- “नहीं दीदी मैं झूठ नहीं बोल रहा। आपकी कसम!!”

दीदी- “तुम इतने बड़े हो गए। और तुम्हें ये सब प्यार मुहब्बत वाली ए बी सी डी नहीं पता.”

मैं- “नहीं मुझे नहीं पता.”

दीदी ने मेरी तरफ लेनी शुरू कर दी। मुझसे पता नहीं क्या क्या कहकर मजाक करने लगी। मैं भी चुपचाप सब सुनता रहा। उन्होंने कुछ देर बाद हँसना बंद किया तो मैंने कहा- “इतना भी नहीं है कि मैं कुछ नहीं जानता। मैंने अभी तक कुछ किया नहीं है। लेकिन मुझे सबकुछ पता है.”

दीदी- “तू भी ब्लू फिल्म देखता है.”

मैं- “हाँ देखता हूँ तुम्हारे ही फोन से.”

दीदी चौंक गई। सच फ्रेंड्स मुझे इसका कोई पता नहीं था कि वो भी देखती हैं। मैंने भी ऐसे ही अपनी सारी बात कह डाली। दीदी कहने लगी। आज बर्थडे के मौके पर एक शो सनी लिओन का देख ही लेते है। मैंने भी हाँ में हाँ मिला दी। दीदी ने अपना लैपटॉप उठाया और एक इयरफोन लगाकर देखने लगी। मैं भी एक इयरफोन लगाकर आवाज सुन रहा था।

दीदी देख देख कर गर्म होने लगी। कंधे पर रखे अपने हाथों से मुझे दबाने लगी। मैं भी मौका नहीं गंवाना चाहता था। आज मैं अपने अंदर की भड़ास को निकालना चाहता था। मैंने भी हिम्मत करके उनकी जांघ पर अपना हाथ रख दिया। मेरा भी अब मन चोदने को करने लगा।

इतने में सनी की चुदाई खत्म हो गई। दीदी ने कहा- “एक और देखते है” ऐसे कर करके हमने दो तीन ब्लू फिल्म देखी। मैंने पैंट में हाथ डालकर लंड के टोपे को छुआ। मुझे कुछ चिपचिपा लगा। मेरा लंड अपना थोड़ा सा माल निकाल चुका था।

मैं दीदी की तरफ देखकर मुस्कुराने लगा। वो अपना चुदासी मुंह बनाये मुझसे कहने लगी- “चलो हम लोग भी ऐसे ही करते हैं” दीदी की बातें सुनकर मैं दंग रह गया। मेरे दिल की बात बोल डाली उन्होंने। मैं भी सीधा बनने का नाटक किया।

मैं- ” मैं आपको कैसे चोद सकता हूँ। तुम मेरी बड़ी बहन हो.”

दीदी- “मुझे पता है तुम मेरे सगे भाई हो। लेकिन चुदाई करने से कुछ हो थोड़ी न जायेगा.”

मैं- “मम्मी जान गई तो हम दोनों लोग घर से भगा दिए जाएंगे.”

दीदी ने जाकर दरवाजा बंद कर दिया। वापस आकर कहने लगी- “अब कोई नहीं जान पायेगा। आज मुझे तुम अपना लंड बर्थडे गिफ्ट समझ कर दे दो.

मैं ना ना कर ही रहा था कि सनी लिओन की तरह वो हवस की पुजारन बनकर मेरे लंड पर अपना हाथ रख दी। वो कहने लगी- “भैया जी आज तुम मेरे सैयां जी बन जाओ। आज मुझे किसी चीज के लिए ना मत करना.”

मैंने कहा- “ठीक है मेरी प्यारी बहना, आज तेरा ये भाई भी देख तेरी हर तरह की ख्वाहिश कैसे पूरी करता है।” इतना कहकर मैंने अपना पैंट धीरे-धीरे उतार दिया। अब सिर्फ डिक्सी स्कॉट का अंडरवियर बचा था, जो मेरे खड़े लंड की वजह से पूरी तरह से फैला हुआ था। लंड इतना सख्त हो चुका था कि वो अंडरवियर के कपड़े को रॉकेट की तरह ऊपर की ओर धकेल रहा था, मानो बाहर आने को बेताब हो।

दीदी की नजरें मेरे उस उभार पर टिक गईं। उन्होंने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ लिया। उनकी उंगलियां धीरे-धीरे उसकी लंबाई और मोटाई को महसूस करने लगीं। वो हल्के से दबाती हुईं साइज़ नाप रही थीं। उनकी सांसें तेज हो गईं।

दीदी बोलीं- “वाओ… कितना बड़ा और मोटा है।” उनकी आवाज में हैरानी और उत्सुकता दोनों थी।

मैंने मुस्कुराते हुए कहा- “दीदी, अभी तो ये और बड़ा होगा।”

मेरी बात सुनकर दीदी की बेचैनी और बढ़ गई। उनकी आंखों में चमक थी और होंठ हल्के से कांप रहे थे। उन्होंने अब बर्दाश्त नहीं किया और एक झटके में मेरे अंडरवियर की इलास्टिक पकड़कर नीचे खींच दिया। अंडरवियर मेरे घुटनों तक आ गया और मेरा लंड आजाद होकर बाहर आ गया। वो सीधा खड़ा था, नसें उभरी हुईं, टोपा गुलाबी और चमकदार।

दीदी की आंखें फटी की फटी रह गईं। उन्होंने अपने मुंह पर हाथ रख लिया और जोर से सांस ली, जैसे कोई आश्चर्यजनक चीज देख रही हों। कुछ पल वो बस उसे देखती रहीं, फिर धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर लंड को सहलाने लगीं। उनकी नरम उंगलियां लंड की पूरी लंबाई पर फिसल रही थीं। टोपे पर पहुंचते ही उन्होंने खाल को पीछे सरकाया। खाल नीचे सरकते ही गुलाबी टोपा पूरी तरह से नंगा हो गया।

दीदी ने आगे झुककर अपने गुलाबी होंठ लंड के टोपे पर रख दिए। पहले तो उन्होंने सिर्फ होंठों से छुआ, फिर धीरे-धीरे जीभ निकालकर टोपे को चाटना शुरू किया। उनकी गर्म जीभ टोपे के चारों ओर घूम रही थी। फिर उन्होंने होंठ खोलकर टोपे को मुंह में ले लिया और हल्के से चूसने लगीं।

मैं लेट गया और कमर ऊपर उठाकर चुसवाने लगा। दीदी अब ज्यादा गहराई से चूस रही थीं। उनका मुंह गर्म और गीला था। वो पूरा टोपा मुंह में लेकर जीभ से घुमातीं, फिर होंठों से कसकर चूसतीं। मैंने उनके बालों को पकड़ लिया और धीरे से उनका सिर आगे खींचा। मेरा लंड उनके मुंह में और गहराई तक चला गया। टोपा उनके गले तक पहुंच गया।

कुछ ही सेकंड में दीदी की सांसें फूलने लगीं। उनकी आंखें भर आईं और वो मुझे विनती भरी नजरों से देखने लगीं। उनकी नाखूनें मेरी गांड में गड़ गईं, जैसे कह रही हों कि बस करो। मैंने तुरंत कमर नीचे की और लंड उनके मुंह से बाहर निकाल लिया।

दीदी ने चैन की सांस ली। उनकी सांसें तेज-तेज चल रही थीं। उन्होंने मेरी गांड पर हल्के से थप्पड़ मारा और बुरा-भला कहने लगीं- “पागल हो गए हो क्या? इतना अंदर तक डाल दिया।”

मैंने हंसते हुए उनके होंठों पर अपना लंड रख दिया और उनका मुंह बंद करवा दिया। फिर इमरान हाशमी की तरह उनके होंठों पर जोरदार किस करने लगा।

दीदी को भी आज अपने भाई पर नाज करवा दिया। मैंने उनके होंठों को इतनी जोर से चूसा कि वो लाल हो गए। लगातार दस मिनट तक मैं उनके नरम, गुलाबी होंठों को चूसता रहा, कभी हल्के से काटता, कभी जीभ से चाटता, कभी गहराई से चूमता। उनकी सांसें तेज हो गईं और होंठ सूजकर चमकने लगे।

फिर मेरी नजर उनके दोनों चुच्चों पर गई। ब्रा के ऊपर से ही वो भरे हुए और उभरे हुए लग रहे थे। मुझसे अब सहन नहीं हुआ। मैंने दोनों हाथ बढ़ाकर उनके दूध को एक-एक हाथ में पकड़ लिया। पहले हल्के से दबाया, फिर धीरे-धीरे मसलने लगा। उनकी चूंचियां मेरे हाथों में नरम और गर्म महसूस हो रही थीं। दबाने के साथ-साथ वो और गर्म होने लगीं।

दीदी की मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं। “……अई…अई….अई……अई….इस स्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” वो बार-बार ऐसी आवाजें निकाल रही थीं, जैसे कोई मीठा दर्द हो रहा हो। उनकी आवाजें मुझे और उत्तेजित कर रही थीं।

मैंने अब उनकी ब्रा की हुक खोली और उसे धीरे से उतार दिया। ब्रा अलग होते ही दोनों गोरी-गोरी चूंचियां आजाद होकर लटक गईं। वो भरी हुई थीं, नीचे की तरफ हल्के से झुकी हुईं। काले रंग के निप्पल सख्त होकर खड़े थे, चारों ओर हल्की सी गुलाबी हल्का घेरा। वो नजारा देखकर मैं पागल हो गया।

मैंने झुककर एक चूची मुंह में ले ली। पहले तो निप्पल को जीभ से घुमाया, फिर होंठों से कसकर चूसने लगा। दूसरी चूची को हाथ से मसलता रहा। दीदी बहुत खुश हो रही थीं। उन्होंने मेरे सिर को अपने चुच्चों में दबा दिया, जैसे मुझे और गहराई से चूसने के लिए कह रही हों। मैं उनके निप्पलों को चूसते हुए कभी हल्के से दांतों से काटता। हर काटने पर वो चीख निकालतीं।

वो जोर-जोर से आवाजें निकाल रही थीं। “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” उनकी मनमोहक सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। वो मुझे पागल कर रही थीं। मैं दोनों चूंचियों को बारी-बारी चूसता रहा, कभी एक को मुंह में लेकर चूसता, कभी दूसरी को। उनकी चूंचियां मेरे मुंह में पूरी तरह से भर जातीं।

कुछ देर बाद मैंने रुककर कहा- “दीदी, अब अपने कुएं का दर्शन करा दो।”

दीदी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- “आओ मेरे कुएं के महाराज, मैं तुम्हें दर्शन के साथ-साथ उसका पानी भी पिलाती हूँ।”

इतना कहकर उन्होंने अपनी जीन्स की बटन खोली और धीरे-धीरे जीन्स उतार दी। अब वो सिर्फ पैंटी में थीं। पैंटी इतनी टाइट थी कि उनकी निकली हुई सफेद-सफेद गोरी गांड साफ-साफ नजर आ रही थी। गांड के दोनों गाल पैंटी में दबे हुए थे और बीच में गहरा खांचा दिख रहा था।

फिर दीदी ने पैंटी की इलास्टिक पकड़ी और एक झटके में उसे नीचे खींच दिया। पैंटी घुटनों तक आ गई और वो पूरी तरह नंगी हो गईं। उनकी चिकनी, गोरी त्वचा चांदनी रात की तरह चमक रही थी। मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया।

उन्होंने खुद अपनी दोनों टांगें फैलाईं। मैंने उनके बीच में बैठकर उनकी चूत को देखा। पहली बार जिंदगी में मैं किसी असली चूत का इतने करीब से दर्शन कर रहा था। वो गुलाबी थी, हल्के से फूली हुई, ऊपर छोटे-छोटे बाल थे जो साफ-सुथरे लग रहे थे। बीच में चूत की दरार गीली चमक रही थी।

मैंने ब्लू फिल्मों में देखे पोर्न स्टारों की तरह झुककर जीभ निकाली। पहले तो चूत की ऊपरी हिस्से पर जीभ फेरी, फिर धीरे-धीरे अंदर की तरफ ले जाकर क्लिटोरिस को छुआ। दीदी की बॉडी में झटका लगा। मैंने जीभ से चूत को चाटना शुरू किया। कभी ऊपर-नीचे, कभी गोल-गोल, कभी क्लिट को चूसता। उनकी चूत से मीठा-मीठा रस निकलने लगा। मैं उसे पीता रहा।

दीदी बहुत गर्म हो गईं। उनकी कमर उठ-उठकर मेरे मुंह की तरफ आने लगी। कुछ ही मिनटों में वो बर्दाश्त नहीं कर पाईं और बोलीं- “जन्मेजय बाबू, अब न तड़पाओ। मेरी चूत में अपना लंड भर दो।” उनकी आवाज में बेचैनी और हवस साफ झलक रही थी।

मैंने सेक्स स्टोरी में पढ़ा था कि तड़पा कर चोदने में बहुत मजा आता है। मैं भी वैसा ही कर रहा था। दीदी की बेचैनी देखकर मैं और उत्तेजित हो गया। उनकी बात सुनकर मैंने उनकी चूत पर अपना लंड रखा। लंड का टोपा उनकी गीली चूत की दरार पर टिका हुआ था। मैंने धीरे-धीरे लंड को ऊपर-नीचे रगड़ना शुरू किया। टोपा क्लिटोरिस पर घिस रहा था, फिर चूत की होंठों के बीच फिसल रहा था। हर रगड़ के साथ दीदी की कमर कांप रही थी और वो और ज्यादा तड़पने लगी। उनकी सांसें तेज हो गईं, चूत से और ज्यादा रस निकल रहा था जो मेरे लंड को चिकना बना रहा था।

दीदी अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं। उन्होंने अपना हाथ नीचे किया और मेरे लंड को पकड़ लिया। उनकी उंगलियां लंड को कसकर जकड़ रही थीं। वो लंड का टोपा अपनी चूत के मुंह पर सेट करने लगीं और धीरे से अपनी कमर आगे की। मैंने भी मौका देखकर हल्का सा धक्का मारा। मेरा टोपा चूत की तंग एंट्री से अंदर सरक गया। चूत की गर्माहट और टाइटनेस ने मुझे झटका दे दिया।

वो जोर-जोर से चीखने लगीं। “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” उनकी आवाजें दर्द और मजा दोनों से भरी हुई थीं। चूंकि घर में मम्मी-पापा सो रहे थे, मैंने तुरंत अपना हाथ उनके मुंह पर रख दिया और आवाज दबा दी। उनकी चीखें अब दबी-दबी सिसकारियों में बदल गईं।

फिर मैंने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड एक झटके में उनकी चूत में जड़ तक घुस गया। चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थीं। दीदी दर्द से तड़प उठीं, उनकी आंखें बंद हो गईं और शरीर कांपने लगा। कुछ सेकंड तक मैं रुका रहा, उन्हें एडजस्ट होने का मौका दिया। फिर धीरे-धीरे चुदाई शुरू कर दी। पहले हल्के धक्के, लंड को आधा बाहर निकालकर फिर अंदर डालता। हर धक्के के साथ उनकी चूत और गीली हो रही थी।

कुछ ही देर में उनकी आवाजें धीमी पड़ने लगीं। दर्द अब मजा में बदल रहा था। मैंने अपना हाथ उनके मुंह से हटा लिया। अब वो खुद अपनी चूत को ऊपर उठा रही थीं, मेरे धक्कों का जवाब दे रही थीं। दीदी सनी लियोन की तरह उत्तेजित होकर बोलने लगीं- “ओह्ह…फ़क..फ़क मी…. ओह्ह माई गॉड फ़क…” उनकी आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मैंने चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी। अब तेज-तेज धक्के मार रहा था, लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था।

दीदी कहने लगीं- “तेरा लंड तो बहुत मजा दे रहा है। और जोर से चोदो, मुझे बहुत मजा आ रहा है।” उनकी बात सुनकर मैं और जोश में आ गया।

कुछ देर बाद मैंने हांफते हुए कहा- “मैं थक गया हूँ। अब तुम ही चुदाई करो, दीदी। अपनी चूत से मेरे लंड को चोदो।” इतना कहकर मैं पीठ के बल लेट गया। मेरा लंड अब भी पूरी तरह खड़ा था, नसें फूली हुईं, टोपा चमक रहा था और दीदी की चूत का रस उस पर चिपका हुआ था। वो देखकर और भी सख्त और गर्म लग रहा था।

दीदी ने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराईं और बोलीं- “अच्छा जी, अब तेरी दीदी तुझे दिखाती है कैसे चुदाई होती है।” वो मेरे ऊपर चढ़ गईं। उनकी गोरी जांघें मेरी कमर के दोनों तरफ फैली हुई थीं। उन्होंने अपना हाथ नीचे किया, मेरे लंड को पकड़ा और धीरे से अपनी चूत के मुंह पर सेट किया। चूत की गर्म, गीली होंठें लंड के टोपे को छू रही थीं। वो धीरे से कमर नीचे कीं और बोलीं- “ले, अब अंदर जा रहा है मेरा राजा… अह्ह…”

पहले टोपा अंदर गया, फिर धीरे-धीरे पूरी लंबाई। एक झटके में पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। चूत की दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं। दीदी ने दोनों हाथ मेरी छाती पर रख लिए। उनके नाखून हल्के से मेरी त्वचा में धंस गए। फिर वो जोर-जोर से उछलने लगीं। हर उछाल में वो ऊपर उठतीं, लंड लगभग बाहर निकल आता, फिर तेजी से नीचे बैठ जातीं और लंड जड़ तक अंदर चला जाता। घच पच… घच्च पच्च… की गीली आवाजें कमरे में भर गईं।

दीदी उछलते हुए बोलीं- “अह्ह… कितना मोटा है तेरा… पूरी चूत भर रही है… और तेज… चोद मुझे…” वो इतनी तेजी से उछल रही थीं कि उनकी चूंचियां ऊपर-नीचे लहरा रही थीं, और चूत की आवाजें और भी तेज हो गईं।

मैं भी नीचे से कमर उठा-उठाकर धक्के मार रहा था। मेरे धक्के उनके उछाल के साथ ताल मिला रहे थे। हर बार जब वो नीचे आतीं, मैं ऊपर से जोर से पेलता और कहता- “दीदी, तेरी चूत कितनी टाइट है… ले, और ले…” हम दोनों की सांसें तेज थीं, पसीना छूट रहा था।

मेरा लंड अब बहुत अकड़ चुका था, झड़ने की कगार पर था। मैंने अब खुद को एकाग्र किया और कहा- “अब घोड़ी बन जा, दीदी। पीछे से पेलूंगा तुझे।” दीदी ने मुस्कुराकर आगे झुक लिया। वो अब घुटनों और हाथों के बल पर थीं, डॉगी स्टाइल में। उनकी गोरी गांड मेरे सामने उठी हुई थी, चूत पीछे से पूरी तरह खुली हुई। मैंने उनके पीछे घुटनों के बल बैठकर लंड को फिर से उनकी चूत में घुसाया। टोपा अंदर जाते ही चूत ने लंड को फिर से जकड़ लिया।

मैंने दोनों हाथों से उनकी कमर मजबूती से पकड़ ली और जोर-जोर से पेलना शुरू कर दिया। पूरा लंड जड़ तक अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के में उनकी गांड के गाल मेरे पेट से टकरा रहे थे, पट-पट की आवाज आ रही थी। मैं तेजी से धक्के मार रहा था, कभी गहराई तक, कभी तेज-तेज छोटे धक्के। दीदी “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” की चीखों के साथ चुद रही थीं। वो बीच-बीच में कह रही थीं- “और जोर से… फाड़ दे मेरी चूत… अह्ह… तेरे लंड का मजा आ रहा है…”

उनकी चूत अब और टाइट हो गई थी, जैसे मेरे लंड को निचोड़ रही हो। अचानक दीदी की बॉडी में तेज कंपन हुआ। उनकी कमर कांपने लगी, चूत सिकुड़ने लगी। वो जोर से कराहते हुए ऑर्गेज्म में चली गईं- “आआआ… निकल रहा है… अह्ह्ह…” उनके कुएं से पानी निकल आया, गर्म रस मेरे लंड पर बहने लगा। मैंने लंड बाहर निकाला तो झरने की तरह सफेद दूधिया माल निकलने लगा। वो झटके-झटके के साथ चूत से माल बहा रही थीं, उनकी टांगें कांप रही थीं।

मैंने झुककर उनकी चूत के पास मुंह लगाया और जीभ से निकलता हुआ माल चाट लिया। सारा माल जीभ पर लिया, फिर निगल गया। उसकी मीठी-नमकीन, थोड़ी खारी खुशबू मुझे बेहद पसंद आई, जैसे कोई नशा हो।

अब मैंने दीदी की गांड मारने का फैसला किया। उनकी चूत से अभी-अभी निकला रस मेरे लंड पर लगा हुआ था, जो अब उनकी गांड के लिए लुब्रिकेंट का काम कर रहा था। मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में ही रखा, उनकी गोरी गांड मेरे सामने उठी हुई थी। गांड के दोनों गाल थोड़े फैले हुए थे, बीच में छोटा-सा गुलाबी छेद सिकुड़ा हुआ दिख रहा था।

मैंने अपना गीला लंड हाथ में पकड़ा और टोपे को उनके गांड के छेद पर लगा दिया। पहले तो सिर्फ बाहर-बाहर रगड़ा, टोपे को हल्के से दबाकर छेद के चारों ओर घुमाया। दीदी की सांसें रुक-रुक कर चल रही थीं। फिर मैंने धीरे से दबाव डाला। टोपा छेद पर दबा, छेद थोड़ा खुला और फिर एक झटके में टोपा अंदर सरक गया। उनकी गांड फट गई जैसा लगा। वो जोर से चिल्लाईं- “आआआ… दर्द हो रहा है… अह्ह्ह…”

उनकी गांड बहुत ही टाइट थी, जैसे कोई नया छेद हो। मेरा लंड रगड़ खा रहा था, हर इंच अंदर जाते वक्त दीवारें उसे कसकर दबा रही थीं। मैंने धीरे-धीरे और अंदर धकेला, आधा लंड अंदर गया। दीदी की बॉडी कांप रही थी, लेकिन वो गांड पीछे करके ले रही थीं। फिर मैंने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। लंड अब पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था, गांड की टाइटनेस से रगड़ इतनी थी कि लंड और भी गरम हो रहा था।

वो “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाजें निकाल रही थीं। दर्द और मजा दोनों मिलकर उनकी आवाजें बन रही थीं। वो गांड हिला-हिला कर चुदाई करवा रही थीं, जैसे कह रही हों और अंदर डालो। मैंने उनकी कमर पकड़कर और जोर से पेलना शुरू किया। मेरी लंड की दोनों गोलियां उनकी चूत पर तेजी से टकरा रही थीं, पट-पट की आवाज आ रही थी।

मेरा लंड अब और ज्यादा टाइट हो रहा था, झड़ने की हद तक पहुंच चुका था। मैंने हांफते हुए कहा- “दीदी, मैं झड़ने वाला हूँ। कहाँ गिराऊं अपना माल?”

दीदी ने पीछे मुड़कर देखा, आंखें नशे में थीं, और बोलीं- “मेरी गांड में ही भर दो सारा माल… अंदर डालकर झड़ो… ले लो मेरी गांड…”

मैंने और जोर से धक्के मारे। कुछ ही सेकंड बाद मेरा लंड फड़का और गरम-गरम चासनी उनकी गांड में भरने लगी। झटके-झटके के साथ सारा माल अंदर डाल दिया। दीदी की गांड मेरे लंड के गरम वीर्य से भर गई। मैंने धीरे से लंड बाहर निकाला तो टप-टप करके सफेद वीर्य उनकी गांड से टपकने लगा, गांड के छेद से बहकर जांघों पर आ रहा था।

दीदी ने सांस ली, फिर बिस्तर से एक साफ कपड़ा उठाया और अपनी गांड को पोंछ लिया। वो साफ करके मुस्कुराईं और बोलीं- “वाह… क्या मजा आया आज।”

एक रात की इस जोरदार चुदाई ने उन्हें मेरे लंड का गुलाम बना दिया। अब वो रोज बेकरार रहती हैं मेरा लंड चखने को। हम दोनों खूब मजा लेते हैं, कभी चुपके से, कभी रात में।

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